अज़ान पढ़ने, नमाज़ पढ़ाने 23

*अज़ान पढ़ने, नमाज़ पढ़ाने और इस्लामी तअ़्लीम देने पर उजरत (यअ़्नी मज़दूरी, तन्ख़्वाह, सैलरी) लेने और सवाब का मसअलह:*

*Neez Farmaate Hain:*
Ab Fatwã Jawaaze Ujrate imaamat (imaamat Kî Mazdoorî Ke Jaayiz) Par Hai Aur Shak Nahîn Ki Ajeer (Ujrat Par Kaam Karne Waalã, Mazdoor) 'Aamile Li-Nafsihî Hai Na Ki 'Aamilullãhi Ta-'aalã 'Haalãnki Us Kî Namaaz Qa't-'an 'Sa'hee'h Hai. 
*📚 Fatãwã Razviyyah, Jild¹⁸, Page⁵⁵⁸*
*نیز فرماتے ہیں:*
اب فتوٰی جواز اجرت امامت (امامت کی مزدوری کے جائز) پر ہے اور شک نہیں کہ اجیر (اجرت پر کام کرنے والا، مزدور) عامل لنفسہ ہے نہ کہ عامل ﷲ تعالٰی حالانکہ اس کی نماز قطعًا صحیح ہے ـ 
*📚 فتاوٰی رضویہ، جِلد¹⁸ صفحہ⁵⁵⁸*
*नीज़ फ़रमाते हैं:*
अब फ़तवा जवाज़े उजरते इमामत (इमामत की मज़दूरी के जाइज़) पर है और शक नहीं कि अजीर (उजरत पर काम करने वाला, मज़दूर) आ़मिले लि-नफ़्सिही है न कि आ़मिलुल्लाह तआ़ला ह़ालांकि उस की नमाज़ क़त़्अ़न स़ह़ीह़ है 
*📚 फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द¹⁸ पेज⁵⁵⁸*
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