अज़ान पढ़ने, नमाज़ पढ़ाने 25

*अज़ान पढ़ने, नमाज़ पढ़ाने और इस्लामी तअ़्लीम देने पर उजरत (यअ़्नी मज़दूरी, तन्ख़्वाह, सैलरी) लेने और सवाब का मसअलह:*

*imãme Ahle Sunnat Farmãte Hain:*
imaamat Wa Azaan Wa Ta'aleeme Fiqh Wa Ta'aleeme Qur-aan Par Ujrat (Mazdoorî) Lene Ko Ayimmah Ne Ba-Zaroorate Zamaanah Jaayiz Qaraar Diyã Hai. 
📚 Fatãwã Razviyyah, Jild⁶, Page⁶³⁹
امام اہلسنت فرماتے ہیں:*
امامت و اذان و تعلیم فقہ و تعلیمِ قرآن پر اُجرت (مزدوری) لینے کو ائمہ نے بضرورتِ زمانہ جائز قرار دیا ہے ـ 
📚 فتاوٰی رضویہ، جِلد⁶ صفحہ⁶³⁹
*इमामे अहले सुन्नत फ़रमाते हैं:*
इमामत व अज़ान व तअ़्लीमे फ़िक़्ह् व तअ़्लीमे क़ुरआन पर उजरत (मज़दूरी) लेने को अइम्मह ने ब-ज़रूरते ज़माना जाइज़ क़रार दिया है - 
📚 फ़तावा रज़विय्यह, जिल्द⁶ पेज⁶³⁹
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