*कितना क़ुरआन याद करना ज़रूरी है?27
*کِتنا قرآن زبانی یاد کرنا ضروری ہے؟*
*कितना क़ुरआन याद करना ज़रूरी है?*
*ह़ुज़ूर स़दरुश् शरीअ़ह फ़रमाते हैं:*
❶ एक आयत का ह़िफ़्ज़ (याद) करना हर मुसलमान मुकल्लफ़ पर फ़र्ज़े ऐ़न है और ❷ पूरे क़ुरआन मजीद का ह़िफ़्ज़ करना फ़र्ज़े किफ़ायह और ❸ सूरए फ़ातिह़ा और एक दूसरी छोटी सूरत या इस के मिस्ल, मसलन तीन छोटी आयतें या एक बड़ी आयत का ह़िफ़्ज़, वाजिबे ऐ़न है -
📚 बहारे शरीअ़त, जिल्द¹ ह़िस़्स़ह³ पेज⁵⁴⁵,⁵⁴⁶ मस्अलह¹³
*मुश्किल अल्फ़ाज़ के मआ़नी:*
*मुकल्लफ़:* जिस पर शरई़ अह़काम की पाबन्दी लाज़िम हो ـ *फ़र्ज़े ऐ़न:* फ़र्ज़े ऐ़न वोह है जिस का अदा करना तमाम मुकल्लिफ़ीन पर फ़र्ज़ हो यअ़्नी स़िर्फ़ कुछ लोगों के अदा करने से सब की जानिब से अदा न हो जैसे नमाज़, रोज़ह, ह़ज वग़ैरह - *फ़र्ज़े किफ़ायह:* फ़र्ज़े किफ़ायह वोह होता है जो कुछ लोगों के अदा करने से सब की जानिब से अदा हो जाता है और कोई भी अदा न करे तो सब गुनाह गार होते हैं जैसे नमाज़े जनाज़ह वग़ैरह
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